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Wednesday, July 18, 2018

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |
पर दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आने रे ||

सकल लोक मान सहने वन्दे, निंदा न करे केनी रे |
वाच काछ मन निश्छल राखे, धन धन जननी तेनी रे ||

सम दृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे |
जिव्हा थकी असत्य न बोले, पर धन नव झाली हाथ रे ||

मोह माया व्यापे नहीं जेने, दृढ वैराग्य जेना मन मा रे |
राम नाम शून ताली लागी, सकल तीरथ तेना तन मान रे ||

वन लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्य रे |
भने नरसैय्यो तेनुं दर्शन करत, कुल एकोतेर तार्य रे ||

अब लौं नसानी, अब न नसैहों।

अब लौं नसानी, अब न नसैहों। रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥ पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं। स्याम रूप सुचि रुचिर कस...