अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥ पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं। स्याम रूप सुचि रुचिर कसौटी चित कंचनहिं कसैहौं॥ परबस जानि हँस्यो इन इंद्रिन निज बस ह्वै न हँसैहौं। मन मधुपहिं प्रन करि, तुलसी रघुपति पदकमल बसैहौं॥ |
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Wednesday, March 20, 2019
अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
Tuesday, October 30, 2018
जो भजे हरि को सदा, सोही परम पद पावेगा
जो भजे हरि को सदा, सोही परम पद पावेगा |
देह के माला, तिलक और छाप, नहीं किस काम के,
प्रेम भक्ति बिना नहीं नाथ के मन भावे |
दिल के दर्पण को सफा कर, दूर कर अभिमान को,
ख़ाक को गुरु के कदम की, तो प्रभु मिल जायेगा |
छोड़ दुनिए के मज़े सब, बैठ कर एकांत में,
ध्यान धर हरि का, चरण का, फिर जनम नही आयेगा |
द्रिड भरोसा मन मे करके, जो जपे हरि नाम को,
कहता है ब्रह्मानंद, बीच समाएगा |
देह के माला, तिलक और छाप, नहीं किस काम के,
प्रेम भक्ति बिना नहीं नाथ के मन भावे |
दिल के दर्पण को सफा कर, दूर कर अभिमान को,
ख़ाक को गुरु के कदम की, तो प्रभु मिल जायेगा |
छोड़ दुनिए के मज़े सब, बैठ कर एकांत में,
ध्यान धर हरि का, चरण का, फिर जनम नही आयेगा |
द्रिड भरोसा मन मे करके, जो जपे हरि नाम को,
कहता है ब्रह्मानंद, बीच समाएगा |
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो |
वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु |
कृपा कर अपनायो ||
जन्म जन्म की पूंजी पाई |
जग में सबी खुमायो ||
खर्च ना खूटे, चोर ना लूटे |
दिन दिन बढ़त सवायो ||
सत की नाव खेवटिया सतगुरु |
भवसागर तरवयो ||
मीरा के प्रभु गिरिधर नगर |
हर्ष हर्ष जस गायो ||
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम |
भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल ना रहा था सहारा |
लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा |
इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||
शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी |
उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी |
युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया |
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||
जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस पर कदम मैं बड़ाऊ |
फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ |
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया |
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम |
भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल ना रहा था सहारा |
लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा |
इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||
शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी |
उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी |
युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया |
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||
जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस पर कदम मैं बड़ाऊ |
फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ |
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया |
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले - २
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले
श्री गंगा जी का तट हो,
यमुना का वंशीवट हो
मेरा सांवरा निकट हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
पीताम्बरी कसी हो
छवि मन में यह बसी हो
होठों पे कुछ हसी हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
श्री वृन्दावन का स्थल हो
मेरे मुख में तुलसी दल हो
विष्णु चरण का जल हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
जब कंठ प्राण आवे
कोई रोग ना सतावे
यम दर्शना दिखावे
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
उस वक़्त जल्दी आना
नहीं श्याम भूल जाना
राधा को साथ लाना
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
सुधि होवे नाही तन की
तैयारी हो गमन की
लकड़ी हो ब्रज के वन की
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
एक भक्त की है अर्जी
खुदगर्ज की है गरजी
आगे तुम्हारी मर्जी
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
ये नेक सी अरज है
मानो तो क्या हरज है
कुछ आप का फरज है
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले
श्री गंगा जी का तट हो,
यमुना का वंशीवट हो
मेरा सांवरा निकट हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
पीताम्बरी कसी हो
छवि मन में यह बसी हो
होठों पे कुछ हसी हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
श्री वृन्दावन का स्थल हो
मेरे मुख में तुलसी दल हो
विष्णु चरण का जल हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
जब कंठ प्राण आवे
कोई रोग ना सतावे
यम दर्शना दिखावे
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
उस वक़्त जल्दी आना
नहीं श्याम भूल जाना
राधा को साथ लाना
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
सुधि होवे नाही तन की
तैयारी हो गमन की
लकड़ी हो ब्रज के वन की
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
एक भक्त की है अर्जी
खुदगर्ज की है गरजी
आगे तुम्हारी मर्जी
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
ये नेक सी अरज है
मानो तो क्या हरज है
कुछ आप का फरज है
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम भक्त मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।
नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो।
याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी।
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।
कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम भक्त मीरा के जैसे बुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।
कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।
नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो।
याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी।
तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो
तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो।
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥
तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे,
कोई ना अपने सिवा तुम्हारे।
तुम्ही हो नईया, तुम्ही खिवईया,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥
जो खिल सके ना वो फूल हम हैं,
तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं।
दया की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥
तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे,
कोई ना अपने सिवा तुम्हारे।
तुम्ही हो नईया, तुम्ही खिवईया,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥
जो खिल सके ना वो फूल हम हैं,
तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं।
दया की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥
जनम तेरा बातों ही बीत गयो
जनम तेरा बातों ही बीत गयो,
रे तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
पाँच बरस का भोला भाला, अब तो बीस भयो,
मगर पचीसी माया का कारन, देश विदेश गयो,
पर तूने कबहू ना कृष्ण कहो,
तीस बरस की अब मति उपजी, लोभ बढ़े नित नयो,
माया जोड़ी तूने लाख करोड़ी, अजहू न तृप्त भयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
वृद्ध भयो तब आलस उपज्यो, कफ नित कंठ नयो,
साधू संगति कबहू न किन्ही रे तूने, बिरथा जनम गयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
ये संसार मतलब का लोभी, झूठा ठाठ रटो,
कहत कबीर समझ मन मूरख, तूं क्यूँ भूल गयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
रे तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
पाँच बरस का भोला भाला, अब तो बीस भयो,
मगर पचीसी माया का कारन, देश विदेश गयो,
पर तूने कबहू ना कृष्ण कहो,
तीस बरस की अब मति उपजी, लोभ बढ़े नित नयो,
माया जोड़ी तूने लाख करोड़ी, अजहू न तृप्त भयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
वृद्ध भयो तब आलस उपज्यो, कफ नित कंठ नयो,
साधू संगति कबहू न किन्ही रे तूने, बिरथा जनम गयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
ये संसार मतलब का लोभी, झूठा ठाठ रटो,
कहत कबीर समझ मन मूरख, तूं क्यूँ भूल गयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,
ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां
ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां |
किलकि किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय |
धाय मात गोद लेत, दशरथ की रनियां ||
अंचल रज अंग झारि, विविध भांति सो दुलारि |
तन मन धन वारि वारि, कहत मृदु बचनियां ||
विद्रुम से अरुण अधर, बोलत मुख मधुर मधुर |
सुभग नासिका में चारु, लटकत लटकनियां ||
तुलसीदास अति आनंद, देख के मुखारविंद |
रघुवर छबि के समान, रघुवर छबि बनियां ||
किलकि किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय |
धाय मात गोद लेत, दशरथ की रनियां ||
अंचल रज अंग झारि, विविध भांति सो दुलारि |
तन मन धन वारि वारि, कहत मृदु बचनियां ||
विद्रुम से अरुण अधर, बोलत मुख मधुर मधुर |
सुभग नासिका में चारु, लटकत लटकनियां ||
तुलसीदास अति आनंद, देख के मुखारविंद |
रघुवर छबि के समान, रघुवर छबि बनियां ||
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् ।
नवकञ्ज लोचन कञ्जमुख कर कञ्जपद कञ्जारुणम् ॥ १ ॥
कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् ।
पटपीत मानहुं तड़ित रूचि-शुची नौमि जनक सुतावरम् ॥ २ ॥
भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् ।
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् ॥ ३ ॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणम् ।
आजानुभुज शर चापधर सङ्ग्राम-जित-खर दूषणम् ॥ ४ ॥
इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् ।
मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादि खलदलगञ्जनम् ॥ ५ ॥
मनु जाहीं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥ ६ ॥
एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषीं अली ।
तुलसी भावानिह पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥ ७ ॥
जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥८॥
नवकञ्ज लोचन कञ्जमुख कर कञ्जपद कञ्जारुणम् ॥ १ ॥
कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् ।
पटपीत मानहुं तड़ित रूचि-शुची नौमि जनक सुतावरम् ॥ २ ॥
भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् ।
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् ॥ ३ ॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणम् ।
आजानुभुज शर चापधर सङ्ग्राम-जित-खर दूषणम् ॥ ४ ॥
इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् ।
मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादि खलदलगञ्जनम् ॥ ५ ॥
मनु जाहीं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥ ६ ॥
एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषीं अली ।
तुलसी भावानिह पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥ ७ ॥
जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥८॥
प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो
प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो |
समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ||
एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो |
सो दुविधा पारस नहीं देखत, कंचन करत खरो ||
एक नदिया एक नाल कहावत, मैलो नीर भरो |
जब मिलिके दोऊ एक बरन भये, सुरसरी नाम परो ||
एक माया एक ब्रह्म कहावत, सुर श्याम झगरो |
अबकी बेर मोही पार उतारो, नहि पन जात तरो ||
समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ||
एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो |
सो दुविधा पारस नहीं देखत, कंचन करत खरो ||
एक नदिया एक नाल कहावत, मैलो नीर भरो |
जब मिलिके दोऊ एक बरन भये, सुरसरी नाम परो ||
एक माया एक ब्रह्म कहावत, सुर श्याम झगरो |
अबकी बेर मोही पार उतारो, नहि पन जात तरो ||
Tuesday, August 7, 2018
निमिया के डाढ़ मइया, लावेली हिंडोलवा कि झूली-झूमी
निमिया के डाढ़ मइया, लावेली हिंडोलवा कि झूली-झूमी
मइया मोरी गावेली गीत कि झूली-झूमी
झुलत-झुलत मइया के लगली पियसिया, कि चली भइली
मलहोरिया अवास कि चलि भइली
सूतल बाड़ू कि जागल ए मालिन, बून एक
मोहि के पनिया पियाव कि बून एक
कइसे में पनिया पियाईं ए सीतली मइया, मोरा गोदे
दीहल बलका तोहार कि मोरा गोदे
बलका सुताव मालिन, सोने के खटोलवा कि बून एक
मोहि के पनिया पियाव कि बून एक
एक हाथे लेली मालिन झंझरा तमरूआ कि दूजे हाथे
सिंघासन पाट कि दूजे हाथे
पनिया त पियलू मइया, पाटे चढ़ि बइठ कि बोल मइया
ई नगरिया कुलसात कि बोल मइया
सगरी नगरिया मालिन, खेम कुसलतिया कि भल मालिन
अब चाहींला तहार कि भल मालिन
जइसन ए मालिन, हमें जुड़ववलू कि ओइसन
तोहर धियवा जुड़ास कि ओइसन
धियवा त बाड़ी मइया, आपन ससुररिया, पतोहिया तोर
बाड़ी आपन नइहरवा पतोहिया तोर
धियवा जुड़ास मालिन, आपन ससुररिया, पतोहिया तोर
अपना नइहर जुड़ास, पतोहिया तोर...
मेरा मन भुला भुला काहे डोले
मेरा मन भुला भुला काहे डोले
प्रभु संग प्रीत लगा ले
प्रभु बिन कौन सम्भाले
जीवन की ये छोटी सी नैय्या
कर दे राम हवाले
प्रभु संग प्रीत लगा ले
प्रभु बिन कौन सम्भाले
जीवन की ये छोटी सी नैय्या
कर दे राम हवाले
जीवन एक बार मिली है
ये फूल एक बार खिले है
जो पल जाये फिर न आये
काहे जनम गँवाये रे
हरि का नाम ध्या ले
जीवन की ये छोटी सी नैय्या
कर दे राम हवाले
ये फूल एक बार खिले है
जो पल जाये फिर न आये
काहे जनम गँवाये रे
हरि का नाम ध्या ले
जीवन की ये छोटी सी नैय्या
कर दे राम हवाले
ये सूरज चाँद तारे
ये रंग रंगीले पंख पखेरु प्यारे प्यारे
रंग रंगीले पंख पखेरु उड़े सारे प्यारे प्यारे
ये सूरज चाँद तारे
ये रंग रंगीले पंख पखेरु प्यारे प्यारे
रंग रंगीले पंख पखेरु उड़े सारे प्यारे प्यारे
ये सूरज चाँद तारे
जगत के ये नर नारी
प्रभु की हैं महिमा सारी
सब को वो चाहे सब में समाये
फिर भी नज़र न आये
प्रभु के खेल निराले
जीवन की ये छोटी सी नैय्या
कर दे राम हवाले
प्रभु की हैं महिमा सारी
सब को वो चाहे सब में समाये
फिर भी नज़र न आये
प्रभु के खेल निराले
जीवन की ये छोटी सी नैय्या
कर दे राम हवाले
आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है
आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है
आते जाते रस्ते में, यादें छोड जाता है
झोंका हवा का, पानी का रेला
मेले में रह जाये जो अकेला
फिर वो अकेला ही रह जाता है
आदमी मुसाफिर है...
कब छोड़ता है, ये रोग जी को
दिल भूल जाता है जब किसी को
वो भूलकर भी याद आता है
आदमी मुसाफिर है...
क्या साथ लाये, क्या तोड़ आये
रस्ते में हम क्या-क्या छोड़ आये
मंजिल पे जा के याद आता है
आदमी मुसाफिर है...
जब डोलती है, जीवन की नैय्या
कोई तो बन जाता है खिवैय्या
कोई किनारे पे ही डूब जाता है
आदमी मुसाफिर है...
आते जाते रस्ते में, यादें छोड जाता है
झोंका हवा का, पानी का रेला
मेले में रह जाये जो अकेला
फिर वो अकेला ही रह जाता है
आदमी मुसाफिर है...
कब छोड़ता है, ये रोग जी को
दिल भूल जाता है जब किसी को
वो भूलकर भी याद आता है
आदमी मुसाफिर है...
क्या साथ लाये, क्या तोड़ आये
रस्ते में हम क्या-क्या छोड़ आये
मंजिल पे जा के याद आता है
आदमी मुसाफिर है...
जब डोलती है, जीवन की नैय्या
कोई तो बन जाता है खिवैय्या
कोई किनारे पे ही डूब जाता है
आदमी मुसाफिर है...
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या
कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या कोई किसी का नहीं ये झूठे, नाते हैं नातों का क्या कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या होगा मसीहा ... होगा मसीहा सामने तेरे फिर भी न तू बच पायेगा तेरा अपनाऽऽऽ आऽऽऽ तेर अपना खून ही आखिर तुझको आग लगायेगा आसमान में ... आसमान मे उड़ने वाले मिट्टी में मिल जायेगा कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या सुख में तेरे ... सुख में तेरे साथ चलेंगे दुख में सब मुख मोड़ेंगे दुनिया वाले ... दुनिया वाले तेरे बनकर तेरा ही दिल तोड़ेंगे देते हैं ... देते हैं भगवान को धोखा, इनसां को क्या छोड़ेंगे कसमे वादे प्यार वफ़ा सब, बातें हैं बातों का क्या
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
सबको सन्मति दे भगवान
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम …
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
सबको सन्मति दे भगवान
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम …
इस धरती का रूप ना उजड़े
इस धरती का
रूप ना उजड़े
प्यार की ठंडी धूप ना उजड़े
प्यार की ठंडी
धूप ना उजड़े, सबको मिले, दाता
सबको मिले
सुख का वरदान
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
इस धरती का
रूप ना उजड़े
प्यार की ठंडी धूप ना उजड़े
प्यार की ठंडी
धूप ना उजड़े, सबको मिले, दाता
सबको मिले
सुख का वरदान
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम
माँगों का सिन्दूर ना छूटे
माँगों का
सिन्दूर ना छूटे
माँ बहनो की आस ना टूटे
माँ बहनो की
आस ना टूटे
देह बिना, दाता, देह बिना
भटके ना प्राण
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम,
माँगों का
सिन्दूर ना छूटे
माँ बहनो की आस ना टूटे
माँ बहनो की
आस ना टूटे
देह बिना, दाता, देह बिना
भटके ना प्राण
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम,
ओ सारे जग के रखवाले
ओ सारे
जग के रखवाले
निर्बल को बल देने वाले
निर्बल को बल
देने वाले
बलवानो को, ओ, बलवानो को
देदे ज्ञान
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम
ईश्वर तेरो नाम
अल्लाह तेरो नाम
ईश्वर तेरो नाम
अल्लाह तेरो नाम
ओ सारे
जग के रखवाले
निर्बल को बल देने वाले
निर्बल को बल
देने वाले
बलवानो को, ओ, बलवानो को
देदे ज्ञान
सबको सन्मति दे भगवान
अल्लाह तेरो नाम
ईश्वर तेरो नाम
अल्लाह तेरो नाम
ईश्वर तेरो नाम
अल्लाह तेरो नाम
Wednesday, July 18, 2018
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |
वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |
पर दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आने रे ||
सकल लोक मान सहने वन्दे, निंदा न करे केनी रे |
वाच काछ मन निश्छल राखे, धन धन जननी तेनी रे ||
सम दृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे |
जिव्हा थकी असत्य न बोले, पर धन नव झाली हाथ रे ||
मोह माया व्यापे नहीं जेने, दृढ वैराग्य जेना मन मा रे |
राम नाम शून ताली लागी, सकल तीरथ तेना तन मान रे ||
वन लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्य रे |
भने नरसैय्यो तेनुं दर्शन करत, कुल एकोतेर तार्य रे ||
पर दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आने रे ||
सकल लोक मान सहने वन्दे, निंदा न करे केनी रे |
वाच काछ मन निश्छल राखे, धन धन जननी तेनी रे ||
सम दृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे |
जिव्हा थकी असत्य न बोले, पर धन नव झाली हाथ रे ||
मोह माया व्यापे नहीं जेने, दृढ वैराग्य जेना मन मा रे |
राम नाम शून ताली लागी, सकल तीरथ तेना तन मान रे ||
वन लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्य रे |
भने नरसैय्यो तेनुं दर्शन करत, कुल एकोतेर तार्य रे ||
Monday, September 18, 2017
मन लागो मेरो यार फकीरी में
मन लागो मेरो यार फकीरी में॥
जो सुख पावो राम भजन में, सो सुख नाही अमीरी में ।
भला बुरा सब को सुन लीजै, कर गुजरान गरीबी में ॥
मन लागो मेरो यार फकीरी में ॥
भला बुरा सब को सुन लीजै, कर गुजरान गरीबी में ॥
मन लागो मेरो यार फकीरी में ॥
प्रेम नगर में रहिनी हमारी, भलि बलि आई सबूरी में ।
हाथ में कूंडी, बगल में सोटा, चारो दिशा जगीरी में ॥
मन लागो मेरो यार फकीरी में ॥
हाथ में कूंडी, बगल में सोटा, चारो दिशा जगीरी में ॥
मन लागो मेरो यार फकीरी में ॥
आखिर यह तन ख़ाक मिलेगा, कहाँ फिरत मगरूरी में ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो, साहिब मिलै सबूरी में ॥
मन लागो मेरो यार फकीरी में ॥
कहत कबीर सुनो भाई साधो, साहिब मिलै सबूरी में ॥
मन लागो मेरो यार फकीरी में ॥
मन फूला फूला फिरे जगत् में, कैसा नाता रे।
मन फूला फूला फिरे जगत् में, कैसा नाता रे।
माता कहै यह पुत्र हमारा, बहन कहे बीर मेरा।
भाई कहै यह भुजा हमारी, नारि कहे नर मेरा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
पैर पकरि के माता रोवे, बांह पकरि के भाई।
लपटि झपटि के तिरिया रोवे, हंस अकेला जाई।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
चार जणा मिल गजी बनाई, चढ़ा काठ की घोड़ी ।
चार कोने आग लगाया, फूंक दियो जस होरी।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
हाड़ जरे जस लाकड़ी, केस जरे जस घासा।
सोना ऐसी काया जरि गई, कोइ न आयो पासा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
घर की तिरया देखण लागी ढूंढत फिर चहुँ देशा
कहे कबीर सुनो भई साधु, एक नाम की आसा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
माता कहै यह पुत्र हमारा, बहन कहे बीर मेरा।
भाई कहै यह भुजा हमारी, नारि कहे नर मेरा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
पैर पकरि के माता रोवे, बांह पकरि के भाई।
लपटि झपटि के तिरिया रोवे, हंस अकेला जाई।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
चार जणा मिल गजी बनाई, चढ़ा काठ की घोड़ी ।
चार कोने आग लगाया, फूंक दियो जस होरी।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
हाड़ जरे जस लाकड़ी, केस जरे जस घासा।
सोना ऐसी काया जरि गई, कोइ न आयो पासा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
घर की तिरया देखण लागी ढूंढत फिर चहुँ देशा
कहे कबीर सुनो भई साधु, एक नाम की आसा।।
जगत में कैसा नाता रे ।।
पागल कहेला ना रे लोगवा पगल कहेला ना
पागल कहेला ना रे लोगवा पगल कहेला ना
हम ता नैहर के बनि रसिलि कि लोगवा पागल कहेला ना
बारह गज के चोलि सिलवइनी, साठ गज के साडी.
तापर लोगवा मुड मुड देखे , जैसे बदन उघारि कि लोगवा पागल कहेला ना
डोलिये में आइनि डोलिये मेंं गइनि, डोलिये मे रह गइले पेट
सासु जे से कभी नाहिं बोलनी, बलमा से ना कभी भेट कि लोगवा पागल कहेला ना
कहत कबिर सुनो भाई साधो ,ये पद है निरबानि
जे येहि पद के अर्थ लगावे,वोहि पुरुश है ग्यानि........
हम ता नैहर के बनि रसिलि कि लोगवा पागल कहेला ना
बारह गज के चोलि सिलवइनी, साठ गज के साडी.
तापर लोगवा मुड मुड देखे , जैसे बदन उघारि कि लोगवा पागल कहेला ना
डोलिये में आइनि डोलिये मेंं गइनि, डोलिये मे रह गइले पेट
सासु जे से कभी नाहिं बोलनी, बलमा से ना कभी भेट कि लोगवा पागल कहेला ना
कहत कबिर सुनो भाई साधो ,ये पद है निरबानि
जे येहि पद के अर्थ लगावे,वोहि पुरुश है ग्यानि........
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अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
अब लौं नसानी, अब न नसैहों। रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥ पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं। स्याम रूप सुचि रुचिर कस...
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पागल कहेला ना रे लोगवा पगल कहेला ना हम ता नैहर के बनि रसिलि कि लोगवा पागल कहेला ना बारह गज के चोलि सिलवइनी, साठ गज के साडी. तापर लोगवा ...
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हम त खेलत रहनी अम्माजी के गोदिया कर गइल तबहि बिआह रे बिदेसिया छवरे महिना कहिके गइले कलकतवा बीत गइल बारह बारिस रे बिदेसिया अब त लगल मोरा सो...
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