Wednesday, July 18, 2018

भारत हमको जान से प्यारा है

भारत हमको जान से प्यारा है
सबसे न्यारा गुलिस्ताँ हमारा है
सदियों से भारत भूमि दुनिया की शान है
भारत माँ की रक्षा में जीवन कुर्बान है

उजड़े नहीं अपना चमन, टूटे नहीं अपना वतन
गुमराह ना कर दे कोई, बरबाद ना कर दे कोई
मंदिर यहाँ, मस्जिद वहाँ, हिन्दू यहाँ, मुस्लिम यहाँ
मिलते रहें हम प्यार से, जागो

हिन्दुस्तानी नाम हमारा है, सबसे प्यारा देश हमारा है
जन्मभूमि है हमारी शान से कहेंगे हम
सभी ही तो भाई-भाई प्यार से रहेंगे हम
हिन्दुस्तानी नाम हमारा है

आसाम से गुजरात तक, बंगाल से महाराष्ट्र तक
जाति कई, धुन एक है, भाषा कई, सुर एक है
कश्मीर से मद्रास तक, कह दो सभी हम एक हैं
आवाज़ दो हम एक हैं, जागो

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |
पर दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आने रे ||

सकल लोक मान सहने वन्दे, निंदा न करे केनी रे |
वाच काछ मन निश्छल राखे, धन धन जननी तेनी रे ||

सम दृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे |
जिव्हा थकी असत्य न बोले, पर धन नव झाली हाथ रे ||

मोह माया व्यापे नहीं जेने, दृढ वैराग्य जेना मन मा रे |
राम नाम शून ताली लागी, सकल तीरथ तेना तन मान रे ||

वन लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्य रे |
भने नरसैय्यो तेनुं दर्शन करत, कुल एकोतेर तार्य रे ||

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीड़ पराई जाने रे |
पर दुख्खे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आने रे ||

सकल लोक मान सहने वन्दे, निंदा न करे केनी रे |
वाच काछ मन निश्छल राखे, धन धन जननी तेनी रे ||

सम दृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे |
जिव्हा थकी असत्य न बोले, पर धन नव झाली हाथ रे ||

मोह माया व्यापे नहीं जेने, दृढ वैराग्य जेना मन मा रे |
राम नाम शून ताली लागी, सकल तीरथ तेना तन मान रे ||

वन लोभी ने कपट रहित छे, काम क्रोध निवार्य रे |
भने नरसैय्यो तेनुं दर्शन करत, कुल एकोतेर तार्य रे ||

नदियाँ चले चले रे धारा


नदियाँ चले चले रे धारा - Nadiya Chale Chale Re Dhara (Manna Dey, Safar)
Movie/Album: सफ़र (1970)
Music By:
कल्याणजी-आनंदजी
Lyrics By:
इन्दीवर
Performed By:
मन्ना डे

नदिया चले, चले रे धारा
चंदा चले, चले रे तारा
तुझको चलना होगा
तुझको चलना होगा

जीवन कहीं भी ठहरता नहीं हैं
आँधी से, तूफां से डरता नहीं हैं
तू ना चलेगा, तो चले तेरी राहें
मंज़िल को तरसेगी तेरी निगाहें
तुझको चलना होगा...

पार हुआ वो रहा जो सफ़र में
जो भी रुका, घिर गया वो भंवर में
नाव तो क्या, बह जाये किनारा
बड़ी ही तेज समय की हैं धारा
तुझको चलना होगा...

तू कितनी अच्छी है

तू कितनी अच्छी है - 

तू कितनी अच्छी है
तू कितनी भोली है
प्यारी-प्यारी है
ओ माँ, ओ माँ
ये जो दुनिया है
ये बन है काँटों का
तू फुलवारी है
ओ माँ, ओ माँ
तू कितनी अच्छी है...

दूखन लागी है माँ तेरी अँखियाँ
मेरे लिए जागी है तू सारी-सारी रतियाँ
मेरी निंदिया पे, अपनी निंदिया भी, तूने वारी है
ओ माँ, ओ माँ
तू कितनी अच्छी है...

अपना नहीं तुझे सुख-दुख कोई
मैं मुस्काया, तू मुस्काई, मैं रोया, तू रोई
मेरे हँसने पे, मेरे रोने पे, तू बलिहारी है

गंगा बहती हो क्यों

गंगा बहती हो क्यों - Ganga Behti Ho Kyon (Bhupen Hazarika)
Lyrics By: नरेन्द्र शर्मा (हिन्दी)
Performed By:
भूपेन हज़ारिका, कविता कृष्णमूर्ति, हरिहरन, शान

औशोमिया (Assamese)
बिस्तिर्नो पारोरे, ओखोंक्यो जोनोरे
हाहाकार क्सुनिऊ निशोब्दे निरोबे
बुरहा लुइत तुमि, बुरहा लुइत बुआ कियो?

हिन्दी
विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा
ओ गंगा तुम
ओ गंगा बहती हो क्यूँ?

नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई
निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूँ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार
निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूँ?

अनपढ़ जन अक्षरहिन
अनगीन जन खाद्यविहीन
नेत्रविहीन दिक्षमौन हो क्यूँ?
इतिहास की पुकार...

व्यक्ति रहे व्यक्ति केंद्रित
सकल समाज व्यक्तित्व रहित
निष्प्राण समाज को छोड़ती ना क्यूँ?
इतिहास की पुकार...

रुदस्विनी क्यूँ न रहीं?
तुम निश्चय चितन नहीं
प्राणों में प्रेरणा देती ना क्यूँ?
उनमद अवमी कुरुक्षेत्रग्रमी
गंगे जननी, नव भारत में
भीष्मरूपी सुतसमरजयी जनती नहीं हो क्यूँ?
विस्तार है अपार...


दिल हूम हूम करे - भूपेन हजारिका
 
दिल हूम हूम करे, घबराए
घन धाम धाम करे, डर जाए
इक बूँद कभी पानी की
मोरी अंखियों से बरसाए

तेरी झोरी डारूं सब सूखे पात जो आये
तेरा छूंआ लागे, मेरी सुखी डार हरियाए
दिल हूम हूम करे...

जिस तन को छुआ तुने, उस तन को छुपाऊँ
जिस मन को लगे नैना, वो किसको दिखाऊँ
ओ मोरे चन्द्रमा, तेरी चांदनी अंग जलाए
ऊंची तोर अटारी, मैंने पंख लिए कटवाए
दिल हूम हूम करे...

अब लौं नसानी, अब न नसैहों।

अब लौं नसानी, अब न नसैहों। रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥ पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं। स्याम रूप सुचि रुचिर कस...