हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे डूबी जब दिल की नय्या, सामने थे किनारे हम थे जिनके सहारे ... क्या मुहब्बत के वादे, क्या वफ़ा के इरादे रेत की हैं दीवारें, जो भी चाहे गिरा दे जो भी चाहे गिरा दे हम थे जिनके सहारे ... है सभी कुछ जहाँ में, दोस्ती है वफ़ा है अपनी ये कमनसीबी, हमको ना कुछ भी मिला है हमको ना कुछ भी मिला है हम थे जिनके सहारे ... यूँ तो दुनिया बसेगी, तनहाई फिर भी डसेगी जो ज़िंदगी में कमी थी, वो कमी तो रहेगी वो कमी तो रहेगी हम थे जिनके सहारे ...
Monday, January 21, 2019
हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे
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अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
अब लौं नसानी, अब न नसैहों। रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥ पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं। स्याम रूप सुचि रुचिर कस...
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