Wednesday, March 20, 2019

अब लौं नसानी, अब न नसैहों।

अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥
पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं।
स्याम रूप सुचि रुचिर कसौटी चित कंचनहिं कसैहौं॥
परबस जानि हँस्यो इन इंद्रिन निज बस ह्वै न हँसैहौं।
मन मधुपहिं प्रन करि, तुलसी रघुपति पदकमल बसैहौं॥ 

अब लौं नसानी, अब न नसैहों।

अब लौं नसानी, अब न नसैहों।
रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥
पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं।
स्याम रूप सुचि रुचिर कसौटी चित कंचनहिं कसैहौं॥
परबस जानि हँस्यो इन इंद्रिन निज बस ह्वै न हँसैहौं।
मन मधुपहिं प्रन करि, तुलसी रघुपति पदकमल बसैहौं॥ 

Monday, February 4, 2019

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से
मोरे प्राण बसे हिम-खोह रे बटोहिया
एक द्वार घेरे रामा हिम-कोतवलवा से
तीन द्वार सिंधु घहरावे रे बटोहिया

जाहु-जाहु भैया रे बटोही हिंद देखी आउ
जहवां कुहुंकी कोइली बोले रे बटोहिया
पवन सुगंध मंद अगर चंदनवां से
कामिनी बिरह-राग गावे रे बटोहिया

बिपिन अगम घन सघन बगन बीच
चंपक कुसुम रंग देबे रे बटोहिया
द्रुम बट पीपल कदंब नींब आम वॄ‌छ
केतकी गुलाब फूल फूले रे बटोहिया

तोता तुती बोले रामा बोले भेंगरजवा से
पपिहा के पी-पी जिया साले रे बटोहिया
सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से
मोरे प्रान बसे गंगा धार रे बटोहिया

गंगा रे जमुनवा के झिलमिल पनियां से
सरजू झमकी लहरावे रे बटोहिया
ब्रह्मपुत्र पंचनद घहरत निसि दिन
सोनभद्र मीठे स्वर गावे रे बटोहिया

उपर अनेक नदी उमडी घुमडी नाचे
जुगन के जदुआ जगावे रे बटोहिया
आगरा प्रयाग काशी दिल्ली कलकतवा से
मोरे प्रान बसे सरजू तीर रे बटोहिया

जाउ-जाउ भैया रे बटोही हिंद देखी आउ
जहां ऋषि चारो बेद गावे रे बटोहिया
सीता के बीमल जस राम जस कॄष्ण जस
मोरे बाप-दादा के कहानी रे बटोहिया

ब्यास बालमीक ऋषि गौतम कपिलदेव
सूतल अमर के जगावे रे बटोहिया
रामानुज-रामानंद न्यारी-प्यारी रूपकला
ब्रह्म सुख बन के भंवर रे बटोहिया

नानक कबीर गौर संकर श्रीरामकॄष्ण
अलख के गतिया बतावे रे बटोहिया
बिद्यापति कालीदास सूर जयदेव कवि
तुलसी के सरल कहानी रे बटोहिया

जाउ-जाउ भैया रे बटोही हिंद देखि आउ
जहां सुख झूले धान खेत रे बटोहिया
बुद्धदेव पॄथु बिक्रमार्जुन सिवाजी के
फिरि-फिरि हिय सुध आवे रे बटोहिया

अपर प्रदेस देस सुभग सुघर बेस
मोरे हिंद जग के निचोड़ रे बटोहिया
सुंदर सुभूमि भैया भारत के भूमि जेही
जन 'रघुबीर. सिर नावे रे बटोहिया. 

Monday, January 21, 2019

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो

लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले से ...

हमको मिली हैं आज, ये घड़ियाँ नसीब से
जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से
फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो
फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो

पास आइये कि हम नहीं आएंगे बार-बार
बाहें गले में डाल के हम रो लें ज़ार-ज़ार
आँखों से फिर ये प्यार कि बरसात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो

लग जा गले कि फिर ये हस्सीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो
लग जा गले कि फिर ये हस्सीं रात हो न हो

हम थे जिनके सहारे, वो हुए ना हमारे

हम थे जिनके सहारे,  वो हुए ना हमारे
डूबी जब दिल की नय्या,  सामने थे किनारे
हम थे जिनके सहारे ...

क्या मुहब्बत के वादे,  क्या वफ़ा के इरादे
रेत की हैं दीवारें,  जो भी चाहे गिरा दे
जो भी चाहे गिरा दे
हम थे जिनके सहारे ...

है सभी कुछ जहाँ में,  दोस्ती है वफ़ा है
अपनी ये कमनसीबी,  हमको ना कुछ भी मिला है
हमको ना कुछ भी मिला है
हम थे जिनके सहारे ...

यूँ तो दुनिया बसेगी,  तनहाई फिर भी डसेगी
जो ज़िंदगी में कमी थी,  वो कमी तो रहेगी
वो कमी तो रहेगी
हम थे जिनके सहारे ...

मैं तेनु समझावां की

मैं तेनु समझावां की
ना तेरे बिना लागदा जी
मैं तेनु समझावां की
ना तेरे बिना लागदा जी
तू की जाने प्यार मेरा
मैं करूँ इंतजार तेरा
तू दिल तूयों जान मेरी
मैं तेनु समझावां की
ना तेरे बिना लागदा जी
तू की जाने प्यार मेरा
मैं करूँ इंतजार तेरा
तू दिल तूयों जान मेरी
मैं तेनु समझावां की
ना तेरे बिना लागदा जी
मेरे दिल ने चुनलैया ने
तेरे दिल दियां राहां
तू जो मेरे नाल तू रहता
तुरपे मेरीया साहा
जीना मेरा होए
हुण्ड है तेरा की मैं करां
तू कर ऐतबार मेरा
मैं करूँ इन्तेजार तेरा
तू दिल तूयों जान मेरी
मैं तेनु समझावां की
ना तेरे बिना लागदा जी
वे चंगा नहियों कीता बीवा
वे चंगा नहियों कीता बीबा
दिल मेरा तोड़ के
वे बड़ा पछताइयां आखाँ
वे बड़ा पछताइयां आखाँ
नाल तेरे जोड़ के
तेनु छड्ड के कित्थे जावां
तू मेरा परछांवा
तेरे मुखड़े विच ही मैं तां
रब नु अपने पावां
मेरी दुआ हाय
सजदा तेरा करदी सदा
तू सुन इक़रार मेरा
मैं करूँ इंतज़ार तेरा
तू दिल तुइयों जान मेरी
मैं तेनु समझावां की
ना तेरे बिना लागदा जी

तेरा मेरा साथ रहे हो तेरा मेरा साथ रहे

तेरा मेरा साथ रहे हो तेरा मेरा साथ रहे
धूप हो, छाया हो, दिन हो कि रात रहे
तेरा मेरा ...

ददर् की शाम हो या, सुख का सवेरा हो
सब गँवारा है मुझे, (साथ बस तेरा हो) -३
जीते जी मर के भी, हाथ में हाथ रहे
तेरा मेरा ...

कोई वादा ना करें, कभी खाये न क़सम,
जब कहें बस ये कहें, (मिल के बिछडेंगे न हम) -३
सब के होंठों पे, अपनी ही बात रहे
तेरा मेरा ...

बीच हम दोनो के, कोई दीवार न हो
तू कभी मेरे ख़ुदा, (मुझसे बेज़ार न हो) -३ 
प्यार की प्रीत की यूँ ही बरसात रहे
तेरा मेरा ...

Tuesday, October 30, 2018

जो भजे हरि को सदा, सोही परम पद पावेगा

जो भजे हरि को सदा, सोही परम पद पावेगा |

देह के माला, तिलक और छाप, नहीं किस काम के,
प्रेम भक्ति बिना नहीं नाथ के मन भावे |

दिल के दर्पण को सफा कर, दूर कर अभिमान को,
ख़ाक को गुरु के कदम की, तो प्रभु मिल जायेगा |

छोड़ दुनिए के मज़े सब, बैठ कर एकांत में,
ध्यान धर हरि का, चरण का, फिर जनम नही आयेगा |

द्रिड भरोसा मन मे करके, जो जपे हरि नाम को,
कहता है ब्रह्मानंद, बीच समाएगा |

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो


पायो जी मैंने राम रतन धन पायो |

वस्तु अमोलिक दी मेरे सतगुरु |
कृपा कर अपनायो ||

जन्म जन्म की पूंजी पाई |
जग में सबी खुमायो ||

खर्च ना खूटे, चोर ना लूटे |
दिन दिन बढ़त सवायो ||

सत की नाव खेवटिया सतगुरु |
भवसागर तरवयो ||

मीरा के प्रभु गिरिधर नगर |
हर्ष हर्ष जस गायो ||

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया

सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम |

भटका हुआ मेरा मन था, कोई मिल ना रहा था सहारा |
लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा |
इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी |
उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी |
युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया |
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस पर कदम मैं बड़ाऊ |
फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ |
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया |
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया | मेरे राम ||

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले - २
गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले 

श्री गंगा जी का तट हो,
यमुना का वंशीवट हो
मेरा सांवरा निकट हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

पीताम्बरी कसी हो
छवि मन में यह बसी हो
होठों पे कुछ हसी हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

श्री वृन्दावन का स्थल हो
मेरे मुख में तुलसी दल हो
विष्णु चरण का जल हो
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

जब कंठ प्राण आवे
कोई रोग ना सतावे
यम दर्शना दिखावे
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

उस वक़्त जल्दी आना
नहीं श्याम भूल जाना
राधा को साथ लाना
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

सुधि होवे नाही तन की
तैयारी हो गमन की
लकड़ी हो ब्रज के वन की
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

एक भक्त की है अर्जी
खुदगर्ज की है गरजी
आगे तुम्हारी मर्जी
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

ये नेक सी अरज है
मानो तो क्या हरज है
कुछ आप का फरज है
जब प्राण तन से निकले
इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं,
राम नारायणं जानकी बल्लभम ।

कौन कहता हे भगवान आते नहीं,
तुम भक्त मीरा के जैसे बुलाते नहीं।

कौन कहता है भगवान खाते नहीं,
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं।

कौन कहता है भगवान सोते नहीं,
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं।

कौन कहता है भगवान नाचते नहीं,
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं।

नाम जपते चलो काम करते चलो,
हर समय कृष्ण का ध्यान करते चलो।

याद आएगी उनको कभी ना कभी,
कृष्ण दर्शन तो देंगे कभी ना कभी।

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो

तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो।
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥

तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे,
कोई ना अपने सिवा तुम्हारे।
तुम्ही हो नईया, तुम्ही खिवईया,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥

जो खिल सके ना वो फूल हम हैं,
तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं।
दया की दृष्टि सदा ही रखना,
तुम्ही हो बंधू सखा तुम्ही हो॥

जनम तेरा बातों ही बीत गयो

जनम तेरा बातों ही बीत गयो, 
रे तुने कबहू ना कृष्ण कहो,

पाँच बरस का भोला भाला, अब तो बीस भयो,
मगर पचीसी माया का कारन, देश विदेश गयो,
पर तूने कबहू ना कृष्ण कहो,

तीस बरस की अब मति उपजी, लोभ बढ़े नित नयो,
माया जोड़ी तूने लाख करोड़ी, अजहू न तृप्त भयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,

वृद्ध भयो तब आलस उपज्यो, कफ नित कंठ नयो,
साधू संगति कबहू न किन्ही रे तूने, बिरथा जनम गयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,

ये संसार मतलब का लोभी, झूठा ठाठ रटो,
कहत कबीर समझ मन मूरख, तूं क्यूँ भूल गयो,
तुने कबहू ना कृष्ण कहो,

ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां

ठुमक चलत रामचंद्र, बाजत पैंजनियां |

किलकि किलकि उठत धाय, गिरत भूमि लटपटाय |
धाय मात गोद लेत, दशरथ की रनियां ||

अंचल रज अंग झारि, विविध भांति सो दुलारि |
तन मन धन वारि वारि, कहत मृदु बचनियां ||

विद्रुम से अरुण अधर, बोलत मुख मधुर मधुर |
सुभग नासिका में चारु, लटकत लटकनियां ||

तुलसीदास अति आनंद, देख के मुखारविंद |
रघुवर छबि के समान, रघुवर छबि बनियां ||

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्

श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम् ।
नवकञ्ज लोचन कञ्जमुख कर कञ्जपद कञ्जारुणम् ॥ १ ॥

कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम् ।
पटपीत मानहुं तड़ित रूचि-शुची नौमि जनक सुतावरम् ॥ २ ॥

भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् ।
रघुनन्द आनंदकंद कोशल चन्द दशरथ नन्दनम् ॥ ३ ॥

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणम् ।
आजानुभुज शर चापधर सङ्ग्राम-जित-खर दूषणम् ॥ ४ ॥

इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् ।
मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादि खलदलगञ्जनम् ॥ ५ ॥

मनु जाहीं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर साँवरो ।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥ ६ ॥

एही भांति गोरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषीं अली ।
तुलसी भावानिह पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मंदिर चली ॥ ७ ॥ 

जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥८॥

प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो

प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो |
समदर्शी प्रभु नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ||

एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो |
सो दुविधा पारस नहीं देखत, कंचन करत खरो ||

एक नदिया एक नाल कहावत, मैलो नीर भरो |
जब मिलिके दोऊ एक बरन भये, सुरसरी नाम परो ||

एक माया एक ब्रह्म कहावत, सुर श्याम झगरो |
अबकी बेर मोही पार उतारो, नहि पन जात तरो ||

Tuesday, August 7, 2018

आओ तुम्हे चाँद पे ले जाए, प्यार भरे सपने सजाए


आओ तुम्हे चाँद पे ले जाए, प्यार भरे सपने सजाए
छोटासा बंगला बनाए, एक नयी दुनिया बसाए

प्यार की है दुनियाँ, दूर आसमां पे
मिलके ना बिछड़े कोई वहाँ पे
ऐसी भी एक डगर है, ऐसा भी एक नगर है

ग़म जहाँ सोए और खुशी जागे
आस की है मंज़िल, तारों से आगे
दिल वहा रोते नही हैं, आँसू तो होते नही हैं


तुझे सूरज कहूँ या चंदा, तुझे दीप कहूँ या तारा


तुझे सूरज कहूँ या चंदा, तुझे दीप कहूँ या तारा
मेरा नाम करेगा रोशन जग में मेरा राज दुलारा

मैं कब से तरस रहा था, मेरे आँगन में कोई खेले    
नन्ही सी हँसी के बदले, मेरी सारी दुनिया ले ले
तेरे संग झूल रहा है मेरी बाहों में जग सारा

आज उंगली थाम के तेरी, तुझे मैं चलना सिखलाऊँ
कल हाथ पकड़ना मेरा जब मैं बूढ़ा हो जाऊँ
तू मिला तो मैने पाया, जीने का नया सहारा

मेरे बाद भी इस दुनिया में, ज़िंदा मेरा नाम रहेगा
जो भी तुझ को देखेगा, तुझे मेरा लाल कहेगा
तेरे रूप में मिल जाएगा, मुझ को जीवन दोबारा

अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे...


अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे...

अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे...
अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे,
रे ननदी दियरा जराई द
दियरा जराई दे अपना भइया के जगा दे
नसे-नसे उठेला लहरिया हे, रे ननदी दियरा जराई द
एक त हम मुअनी रामा अपना दरद से
दोसरे इ रतिया अन्हरिया रे, हे ननदी दियरा जराई द
पटना सहरिया से बइदा बुलाई द-2
पोरे-पोरे उठेला दरदिया रे, हे ननदी दियरा जराई द
कहत महेंदर ननदी भइया के बोलाई द
उनही से उतरी इ लहरिया रे, हे ननदी दियरा जराई द
अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे, रे ननदी दियरा...

सासु मोरा मारे रामा बांस के छिउंकिया

सासु मोरा मारे रामा बांस के छिउंकिया
ए ननदिया मोरी रे सुसुकत पनिया के जाय.
हाथवा में लिहली ननदो सोने के घरिलवा
ए ननदिया मोरी रे चलि भइली जमुना किनार
ग्ंागा रे जमुनवा के चिकनी डगरिया
ए ननदिया मोरी रे पउआं धरत बिछलाय
छोटे-मोटे पातर पियवा हंस के ना बोले
ए ननदिया मोरी रे से रहे पियवा कहीं चली जाय
छोटे मोटे जामुन गछिया फरेना फुलाय
ए ननदिया मोरी रे से हो गछिया सूखिया ना जाय
गावत महेंदर मिसिर इहो रे पुरूबिया
ए ननदिया मोरी रे पिया बिनु रहली ना जाय...

अब लौं नसानी, अब न नसैहों।

अब लौं नसानी, अब न नसैहों। रामकृपा भव-निसा सिरानी जागे फिर न डसैहौं॥ पायो नाम चारु चिंतामनि उर करतें न खसैहौं। स्याम रूप सुचि रुचिर कस...